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Fathers Day Poetry In Hindi

ख़ुद के लिये नहीं वो है जीता,
खुशियों से रहा सदा वो रीता,
उंगली पकड़ कर राह दिखाता,
गमों के साये से रखता दूर वो है पिता। ।
-डाॅ राजमती पोखरना सुराना


ये हैं हमारे पिता , बिल्कुल नारियल समान
ऊपर से सख्त पर , पर अन्दर से
कोमल मीठी गड़ी जैसे
परिवार के मुखिया , अडिग बरगद समान
सबका ध्यान हैं रखते , हर विपदा को खुद ही झेलते
बच्चों की अंगुली पकड़ , चलना सिखाते
जीवन की सही राह दिखाते
सही गलत की पहचान कराते
तभी तो बन जाते वे बच्चों के हीरो ।।
-मंजू लता

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