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Fathers Day Poetry In Hindi

सर्दी हो गर्मी हो बरसात हो
कभी नहीं उफ करता है पिता
दिन रात मेहनत करता है
मगर कभी नहीं थकता है पिता
मां तो जन्म देती है
पालनहार है पिता
बाहर से कठोर अंदर से
कोमल दिल का होता है पिता
मां का श्रृंगार बच्चों का भगवान है पिता
इसीलिए कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता।
-ऋतू जैन

Father’s Day Poetry In Hindi | कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता। जब माँ डॉँटती थी तो कोई चुपके से हँसता था
Fathers Day Poetry In Hindi | कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता। जब माँ डॉँटती थी तो कोई चुपके से हँसता था

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता।
एक बेटी के लिए उसका आसमान है पिता।
कड़ी धूप में छाया देने वाला बादल है पिता।
जिस हिम्मत से वह लड़ लेती है हर मुश्किल से
उसकी वह हिम्मत है पिता।
-दीपाली


पिता ही तो छाव हैं पिता है तो सारे चाव है….
मन की सारी रौनके पूरी करे आपकी मन्नते…
मान भी शान भी पिता है तो सारी जन्नते…
कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता…!!
-(नेह)


मेरी पहचान पिता से
क्या कहूँ किसी से ?
बिन पिता न अभिमान
और न ही स्वाभिमान।
-सर्वेश कुमार गुप्ता


उनके होते मुझे कोई कुछ गलत
कहने की हिम्मत नहीं पाता था जुटा
मतलबी दुनिया है जानते हुए भी
सब पर दिल का खजाना देते थे लुटा
मस्तमौला अंदाज में तकलीफ़ को भी
पलटकर बना दिया करते थे लतीफा
करते थे दिन रात एक हमें सहूलियतें देने में
हमारी बारी से पहले ही कह गए अलविदा
आपके नाम से जुड़े इत्रराए हुए महकते हैं
कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान होते हैं पिता।🙏
-नीति जैन

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