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Fathers Day Poetry In Hindi

उंगली पकड़ कर सिखलाता वो है पिता
सही मूल्यों संग जीना सिखाता वो है पिता
स्वाभिमान संग जीने का तरीका देता वो है पिता
सत्य प्रेम निष्ठा की प्रतिमूर्ति जो है वो है पिता
नाम रोशन है जग में अगर तो मूल स्त्रोत है पिता।
शत शत नमन।
-मधु खरे


हर कठिनाई से बच्चे को बचाता
सर पर छत सा छा जाता
हो कोई भी संकट बड़ा तो जुबां पे बस बाप रे ही है आता
वो पिता ही तो है जो हर मुश्किल में ढाल बन जाता
हर बच्चे का पहला हीरो पिता ही तो कहलाता
बाजार का हर खिलौना, पिता से ही तो आता
और बचपन में चलना भी पिता ही उंगुली को पकड़कर सिखलाता ।।
-नूतन योगेश सक्सेना

Father’s Day Poetry In Hindi | कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता। जब माँ डॉँटती थी तो कोई चुपके से हँसता था
Father’s Day Poetry In Hindi | कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता। जब माँ डॉँटती थी तो कोई चुपके से हँसता था

पिता उंगली पकड़ कर चलना सिखाता
हँसना सिखाता, बोलना सिखाता
ज़िन्दगी को ज़िंदादिली से जीने का
सलीका सिखाता।।
-अनीता गुप्ता

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