उंगली पकड़ कर सिखलाता वो है पिता
सही मूल्यों संग जीना सिखाता वो है पिता
स्वाभिमान संग जीने का तरीका देता वो है पिता
सत्य प्रेम निष्ठा की प्रतिमूर्ति जो है वो है पिता
नाम रोशन है जग में अगर तो मूल स्त्रोत है पिता।
शत शत नमन।
-मधु खरे
हर कठिनाई से बच्चे को बचाता
सर पर छत सा छा जाता
हो कोई भी संकट बड़ा तो जुबां पे बस बाप रे ही है आता
वो पिता ही तो है जो हर मुश्किल में ढाल बन जाता
हर बच्चे का पहला हीरो पिता ही तो कहलाता
बाजार का हर खिलौना, पिता से ही तो आता
और बचपन में चलना भी पिता ही उंगुली को पकड़कर सिखलाता ।।
-नूतन योगेश सक्सेना

पिता उंगली पकड़ कर चलना सिखाता
हँसना सिखाता, बोलना सिखाता
ज़िन्दगी को ज़िंदादिली से जीने का
सलीका सिखाता।।
-अनीता गुप्ता






