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Fathers Day Poetry In Hindi

जब माँ डाँटती थी तो चुपके से कोई हंसता था
माँ से बचा नज़रें ज़रा अंक में कोई भरता था
फ़िर हंसी हंसी में माँ को नाराज़ न करने की
नसीहत मेरे मन में कोई धीरे धीरे भरता था ।
-उमंग सरीन


सौगात है पिता!
दीपावली की रोशनी,होली का रंग है पिता
जी उठता है सिर्फ उनके एहसास मात्र से
घर का कोना कोना,वो रोशनी है पिता
जज्बात,विश्वास और आधार है पिता
मेरी जिंदगी की किताब के सबसे सुंदर
अध्याय है पिता!
पिता धर्म है,पिता अध्यात्म है
बड़े शानदार,नायाब नैमत है पिता
ईश्वर की दी हुई सबसे बड़ी सौगात है पिता
पिता मेरे लिये शब्द नहीं अभिव्यक्ति है
वो मेरे जीवन की सबसे महान हस्ती है!
उँगली पकड़कर चलना सीखाया
अपने कंधे पे बैठकर दुनिया घुमाया
माँ के माथे की बिंदी,घर के बुनियाद है पिता
जिनके क़दमों मे है जन्नत वो स्वर्ग है पिता!
छत है ,बुनियाद है,नींव है पिता
बच्चों के शौक के कद्रदान
जिंदगी का सार है पिता
बेटे का हौसला,’बेटी का ‘कन्यादान’ है पिता
जिंदगी का सार,प्यार की पराकाष्ठा है पिता!
हमारे हर चोट की दवा जानते है वो
डाँटकर हमें खुद रो देते है पिता
कड़ी धूप में शीतल छावं है पिता
पिता सिर्फ पिता है ये जानते है वो
बच्चों की हर हरकत पहचानते है वों
परिवार की खामोशी भी सुन जाते है वों!
वो पिता ही है जो सबके सोने के बाद भी जागते है
सबकी तसल्ली में अपनी नींद ढूंढ लेते है
पिता के जाने के बाद
सिर्फ रिक्तता रह जाती है बस……
ये सभी जानते है
पिता के प्रेम कोई मोल नहीं है
ये तो अनमोल है!
-राधा शैलेन्द्र

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