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Fathers Day Poetry In Hindi

कभी अभिमान तो कभी
स्वाभिमान है पिता
कभी घर की छ्त जिसकी
छत्रछाया में सुखी घर परिवार ।
कभी अनुशासन की वो छड़ी
जिससे अनुशासित परिवार ।
कभी जिम्मेदारियों को पूरी करने
में खुद को भी बेच देता ऐसा
व्यापारी पिता ।
हमेशा सबके दुःख दर्द को सुनता
अपना दर्द किसी से न कहता,
ऐसा दिलदार पिता ।
-मृदुला सिंह


मेरी बेटी मेरा ही अक्स है
मेरी बेटी मेरा गुरुर है
मेरी बेटी को नज़र ना लगे
मेरी बेटी कोहिनूर है।
-अनीता गुप्ता


पल पल में है तू, पापा
मेरा हर पल है तू !!
कभी सख्त शिखर सा तो कभी
कोमल कमल है तू !
बेटी को ,बेटी नहीं
परियों सा माना..
वो अद्भुत ,आसमान विशाल है तू ।
खुदा के साबर का सबसे मीठा फल है तू !
मेरा तो हीरो रियल है तू, बस पापा एक तू !!
-श्वेता जैन


पिता हमारे , जीवन के मजबूत स्तंभ
स्वभाव से कड़क पर रखें हर किसी पर नजर
आने वाली हर विपदा पहले उन से ही टकराए
बच्चों को जीवन की सही राह दिखाते
उंगली पकड़ कर चलना सिखाते
हर मुसीबत से लड़ना सिखाते
नमन करती हूँ उस पिता को
जो हर वक्त हर मुसीबत में
हम उन्हें अपने बगल में ही खड़ा पाते ।।
-मंजू लता

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