बिखेर दो तिरंगे के रंगों को
आबाद खुद को कर लो।
आज़ादी के इस जश्न मे
शहीदों के बलिदान के रंग मे खुद को रंग लो।
मत भूलो उन शहादतों को
जिस क्रान्ति मे बच्चा बच्चा शहीद हुआ था।
मातृभूमि की आन मे कितनों ने कफ़न ओढ़ा था।
याद करो उन वीरों को जिन्होंने
रंग दे बसंती चोला का नारा दिया था।
रंग गया था हिन्दुस्तान
गूँज गया था आज़ादी के नारों से।
आज़ाद फिज़ायें चल उठी थीं।
तिरंगा शान लिये खड़ा था।
आज माँ भारती ये पुकार रही-
गुहार ये लगा रही।
ये आसमान रंग दो केसरिया
शान्ति के रंग हवाओं मे
बिखेर दो
धरती को हरे रंग का चोला ओढ़ा
तिरंगे को कण कण मे रोप दो
ये शान है ,ये आन बान है
इसे इसी शान से लहराने दो…..
– Pratibha Ahuja Nagpal
दिल भर दो उल्लास से……आज हम आज़ाद हैं……शांत कर लो मन अपना……..आज प्रगति और विकास है…..पर मत भूलना उस क़ुर्बानी को…..जिससे आज़ादी पाई है……..यह आसमान रंग दो केसरिया…….देश की ख़ुशहाली के लिए अर्शों से दुआएँ आई हैं……!
वंदेमातरम।
– Seema Bhargave
तस्वीर वतन-ए-यार की,
बहुत ख़ूबसूरत है, तस्वीर वतन-ए-यार की,
बहुत बेशकीमती,सुकून-ए-सीरत हमारे प्यार की।
यूँ ही नहीं हम, इसके दीवाने हो गए,
बहुत दिलकश है, हर अदा वतन-ए-यार की।
कुछ तो अलग बात है,जो सब फ़िदा हुए,
कुछ अजीब सी कशिश है, इसके रुख़सार की।
मंज़ूर नहीं होगी, गुस्ताख़ी इसकी शान में,
हर एक है तैयार, बाज़ी लगाने जान की।
कोई जान भी माँगे,एक पल को न सोचेंगे,
हर इम्तिहान देंगे, कसम है हिंदुस्तान की।
रंग में रंग गए हैं, सब लोग मेरे गाँव के,
बहुत ही रंगीन है, रंगत वतन-ए-यार की।
Kavita Singh






