बेकार ना होंगे कभी जज्बात ,
होगी जब साझा मन की बात,
लगाव का सारा खेला है यहाँ,
नही तो कौन किसकी सुनता।।
—Sarvesh Kumar Gupta
प्रभु दरबार जायें कैसे?
जिंदगी गुमराह करती हैं।।
कभी देती है दरिया -ए -गम।
कभी बयार खुशियों की बहती है।।
— Poonam Deshwal
जिन्दगीगुमराहकरती_है
ना समझी वजह शिकवे की,
जिन्दगी क्यूं गुमराह करती है।
यह जीवन अद्भुत अनूठा प्रतिपल,
निश्छल,निष्कपट पर प्रतिघात करती है।
— Kiran Pandey
बड़ी बेपरवा सी हो गई है जिंदगी
कभी हंसाती तो कभी रुलाती है कभी पलकों में हसीन ख़्वाब सजाती है ,
तो कभी पल में चकनाचूर कर जाती है
अब,तुझसे कैसी गिला-शिकवा ए जिंदगी
जीने की वजह भी तू और जज़्बा भी तुझसे,
जिंदगी की राह में खड़ी मैं ये सोंचती
जाने क्यों गुमराह करती है जिंदगी ??
— Pushpa Pandey
जिन्दगी कहाँ गुमराह करती है
ये तो हम हैं जो खुद ही गुमराह होते रहते हैं
ख्वाहिशों का मंजर सर पर सवार रहता है
बस इसी मृगतृष्णा में, गलत रास्ते चुन लेते हैं
और शिकायत करते हैं जिन्दगी से
जिन्दगी गुमराह करती है।
— Manju Lata
जिंदगी गुमराह करती है जिंदगी हसाती है जिंदगी रुलाती है न जाने इस दौर में जिंदगी कहां खो गई है a जिंदगी जीने में बहुत कुछ सिखा जाती है क्योंकि हमें जिंदगी गुमराह करती हैं
— Ritesh Agrawa
एक पहेली है जिंदगी
कभी हंसाती है कभी रुलाती है
कभी आशा और विश्वास देती है
कभी निराश कर देती है
कभी गुमराह कर देती है।
— Anita Gupta
जिंदगी का जीना स्वभाव
आशा या उम्मीदें ही नही
हताशा और निराशा भी है
धर्म से है जीवन की शाश्वतता
— Sarvesh Kumar Gupta
प्रभु दरबार जाएं कैसे?
जिंदगी गुमराह करती है।।
कभी दरिया- ए-गम देती है।
कभी बयार खुशियों की बहती है।।
— Poonam Deshwal
कलाकार की कला का प्रदर्शन होते ही
उसका मान सम्मान होने लगता है
और उसकी प्रतिष्ठा बढ़ जाती है।
— Anita Gupta
कला का प्रदर्शन होते ही,
या तो इंसान बिखर जाता है।
या निखर जाता है।।
— Poonam Deshwal
धीरे से मचले मन
करे हृदय में स्पंदन
स्वप्न या वास्तविक
कला से जब तृप्त
— Sarvesh Kumar Gupta






