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Hindi January Quotes

राह चलते – चलते कुछ अनजाने लोग ऐसे मिल जाते है
जो निस्वार्थ भाव से इंसानियत की सेवा करते नजर आते हैं
ऐसे लोग वो दिव्य जोत होते हैं जो समाज- देश के खातिर
खुद को हंसते – हंसते, कर देते हैं कुर्बान।।
— Manju Lata


कभी कभी जिंदगी में हम निकल पड़ते हैं
एक अनजाने सफ़र पर,अपनी मंज़िल पाने को
आते जाते कुछ अनजाने लोगों से मुलाकात हो जाती है
उनमें से कुछ लोग भूल जाते हैं ,लेकिन कुछ खास लोग
अनजाने सफ़र में भी यादगार बन जाते हैं!!
— Pushpa Pandey


सुरहुरी सर्दी और चाय की चुस्की
दिल- दिमाग ताजा कर देती
न सिर्फ शरीर गरम हो जाता
बल्कि काम की फुर्ती, नए सिरे से आ जाती।।
— Manju Lata


सुबह सुनहरी आई,
धड़कनों का एहसान ,
सर्दी गर्मी की अनुभूति,
है जिंदगी का अहसास!
— Sarvesh Kumar Gupta


सुबह अलसाई आंखों से उठकर
चाय पीने का मजा ही कुछ और है
चाय पीते पीते सपने देखना और
उनको पूरा करने के लिए जुट जाने
का मजा ही कुछ और है।
— Anita Gupta


मैं कंपा देने वाली दुविधा पर
धैर्य की गर्म शाल ढंक लेती हूं
चाय की ही तरह , पहले भांप ले
खुशबू और चुस्की का मजा लेती हूं
मैं चाय की गर्म प्याली की तरह
जिंदगी को भी भरपूर जीती हूं
क्यों कि मैं भूत भविष्य में नहीं
वर्तमान से पूर्ण संतुष्ट रहती हूं।
— Neeti Jain


ख़ुद को समझने के लिए, हमें दूसरों की जरूरत नहीं
अपने अंतर्मन के झरोखे में झांककर देखें,जहां सिर्फ़ हम ही हम होंगें !
आइना बिल्कुल स्पष्ट दिखेगा, कलुषित या रहित
अपनी चेतना को जागृत कर, ख़ुद में स्वयं को पहचान,आत्मसात करना होगा !!
— Pushpa Pandey


खुद को समझने के लिए , अपने अंतर्मन में झांकना चाहिए
अपने कर्मों पर विचार करें, अपने गुण – दोष का आवलोकन करें
अपना अस्तित्व खुद – ब – खुद समझ में आने लगेगा।
— Manju Lata


खुद को समझने के लिए अपने
अंतर्मन में झांकना पड़ता है
हम कौन हैं, कहां से आए हैं ?
अपनी चेतना को झंकृत कर
स्वयं को पहचान कर ही
सही मार्ग दर्शन मिलेगा।।
— Anita Gupta


खुद को समझाने के लिए
अंतर्मन से किए सवाल बहुतेरे।
प्रश्न ज्यों का त्यों रहा बिखरा
ढ़ूंढते रहे विश्वास सुनहरे।
— Kiran Pandey


जीवन गतिशील है
खुद को समझने के लिए
जीवन की शाश्वतता को समझे
— Sarvesh Kumar Gupta


कभी-कभी हम खुद को नहीं समझ पाते हैं न जाने कहां खो जाते हैं जिंदगी में बहुत समय लगता है खुद को समझने के लिए जब तक हम अपने आप को समझते हैं तब तक बहुत लेट हो जाता है जिंदगी कहीं निकल जाती है कुछ जिंदगी बसती है तब तक अफसोस मानते हैं अब क्या करें जिंदगी है कितने जिए हैं उतने ही में खुश रहेंगे अरे जिंदगी समझने में लेट हो गया तो क्या हुआ
— Ritesh Agrawal

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