सावन की रिमझिम फुहार हैँ बेटियां
चन्दन की भीनी सी खुशबू हैँ बेटियां
मा का करार और पापा का गुरुर हैँ बेटियां
पापा के दिल के करीब होती हैँ बेटियां।।
— Anita Gupta
उस्ताद जो था शायरी का एक दौर में
वो खास भी तो भीड़ में अब आम ही तो है
महफ़िल में तालियों पे खड़ा था जो एक दिन
अंजाम उसका सुब्ह से फिर शाम ही तो है
— Shreyasi Vaishnav Shreya
बेटी बाबुल के कंधों का भार नहीं होती..”पिता”
कंधों पर बैठाकर उनका कद बढ़ाना चाहते हैं,
बचपन से ही दूरदर्शिता का पाठ पढ़ाना और
स्वयं से अधिक विस्तृत दृष्टिकोण देना चाहते हैं।
— Neeti Jain
साहस ,इज्जत, बल, यश,शान,
पिता संगलोहसशक्त अभिमान।
थके हुए भी बांटते हैं खुशियां,
अंश प्रणम्य दीपक जल भान।
संगति, प्रगति पथ व्याकुल हो,
अंतर्मन छुपा संतति पिता महान।
अभिलाषा बस एक ही उर रहती,
गगन सा विस्तृत उड़ान संतान।
— Kiran Pandey
मैं पिता हूँ!
जब तुम मुस्कुराती हो,
मैं खिल उठता हूँ।
जब तुम गुनगुनाती हो,
मैं नाच उठता हूँ।
तुम्हारे सपनों को मैं जीता हूँ,
मेरी लाडली!
मैं तुझमें जीता हूँ।
कभी आँच नहीं आने दूँगा,
मुश्किल हालातों की।
मैं रोक दूँगा हर लहर,
बढ़ते तूफ़ानों की।
मैं पिता हूँ!
— Kavita Prabha
जो तुम सुन सको तो मैं अशआर कह दूं
तुम्हें तल्खियों में गुनहगार कह दूं
वो देता है सच की जो हरदम दुहाई
हा मन कर रहा उसको अखबार कह दूं
किए वादे सबसे निभाए कभी क्या
हुकूमत को कैसे वफादार कह दूं
गिरा के नज़र होश मेरे उड़ाते
ये दिल अब तेरा ही तलबगार कह दूं
जो रख हौंसला लड़ रहा है समर में
वो अदना सा कोई न किरदार कह दूं
मुझे गोलियों से डराना न काफ़िर
कफन मैने बांधा है यलगार कह दूं
सुनोगी ख़ुद ही की तो आगे बढ़ोगी
ज़माना ये श्रेया है अय्यार कह दूं
— Shreyasi Vaishnav Shreya
जीभ.. कितनी कोमल
बोल दे अक्सर अजब-अजीब
कि टूँट जाएं अच्छे अच्छे घर
तोड़ दे अच्छों अच्छों को
— Sarvesh Kumar Gupta
इधर उधर भटकना छोड़कर,
दूसरों की नकल करना छोड़कर
अपनी ताकत को पहचानो
और सपनों को पूरा करने में लग जाओ
सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।।
— Anita Gupta
उठो, यूं औंधे मुंह गिरकर अपने को कमजोर मत बनाओ!
अपनी ताकत को पहचानो, बुलंद कर अपने हौसले को, मजबूत इरादों के साथ
जिस कामयाबी का लक्ष्य तूने ठाना है,
उस मंजिल तक तो अपने को पहुंचाओ!!
— Pushpa Pandey
अपने सपनों को जानो।
अपने लक्ष्य को ठानो।
असंभव कुछ नहीं होता,
अपनी ताकत को पहचानो,
— Kavita Prabha
अर्जुन सा अपनी लक्ष्य को ठानो
स्वयं वजूद स्वयं सपना पहचानो।
असंभव कार्य संभव संग बांधों,
ताकत अपनी तुम खुद पहचानो।
— Kiran Pandey
देखा जाए तो रात विश्राम स्थल होता है
लेकिन गौर से अगर देखा जाए , तो
रात कई कहानियाँ भी कहती है
यही कहानी तथा उसका निचोड़
भोर का स्वागत भी करती है ।।
— Manju Lata






