सुबह की पहली किरण जब धरती पर पड़ती है,
नई ऊर्जा,नई जिन्दगी,बेजान सी दुनिया में भरती है।
चहक उठते हैं पंछी सारे,चांदी के पहाड़ों पर सोने सा रंग भरती है।
भर लो सातों रंग जीवन में,यही संदेश पहली किरण सबको देती है।
— Nidhi Paladhi
किरण सूरज की हो,
या हो आशा की,
हर स्थिति-परिस्थिति में,
अंधकार मिटा देती है।।
— Sarvesh Kumar Gupta
सबके हिस्से में नहीं आता, खुला आसमां।
मेहनत और संकल्प से हासिल होता ये जहां।
— Kavita Prabha
ताना-बाना यहाँ है दिन-रात का,
नफरत-मोहब्बत में है चुनना एक।
— Sarvesh Kumar Gupta
दोस्त ज़िंदगी हैँ,दोस्त प्रेरणा हैँ
सबके हिस्से में नहीं आता ये प्यार
वो खुशनसीब होते हैँ जिनको,
सच्चे दोस्तों का साथ मिलता है।।
— Anita Gupta
सबके हिस्से में नहीं आता, अपनों का प्यार और माँ – बाबा का आशीर्वाद
ये तो भेरी खुशनसीबी है, जो मैंने पाया जमाने भर का प्यार।।
— Manju Lata
सबके हिस्से में नहीं आता, सफलता का मीठा स्वाद,
बिलखता रोता मन, सपने कर देते है बर्बाद।
— Anshita Dubey
सबके हिस्से में नही आता, मन चाहा सुन्दर स्वजन साथ,
मुर्छित तन शुष्क नयन, नित्य बाट निहारे फुटपाथ।
— Kiran Pandey
सेवा भाव से जीना सिखा कर,
माँ ने जीने का अर्थ समझाया।
फिर भी मन आशांत रह कर,
निराशा और उदासीनता में रहता।।
— Sarvesh Kumar Gupta
अचानक याद आने लगे जब कोई
सोच लो मन का बुलावा है किसी का
प्रभु को स्मरण कर बढ़ चलो आगे – आगे
क्या पता काल ने कुछ अच्छा ही सोचा है हमारे लिए ।।
— Manju Lata
बस मन का बुलावा है, स्वप्न सच होने को तैयार हैं।
बस हाथ बढ़ाना है, आसमां झुकने को तैयार हैं।
— Kavita Prabha
लम्बे सप्ताहांत की छुट्टी में
कई बिछड़े लोग मिले,अपनों का प्यार मिला
पुरानी यादें ताजा हुई जब आम के पेड़ तले मैं बैठी
सहेलियों संग कच्चे आम की केरी खाना
झूलों पर बैठ पेंगे लेना, कजरी, मल्हार का तान छेड़ना
उसी आम के छाँव में सहेलियों संग बोल – ठोल
मेंहदी लगना – लगाना, मिट्टी का शिवलिंग बना, ढेरों मन्नतें मानना
लम्बी सप्ताहांत की छुट्टी ने सारे सुखद पल ताजा कर
फिर अपने काम पर लौटने को मजबूर किया।।
— Manju Lata
लंबे सप्ताहांत की छुट्टी में, अंतर्मन को नव उल्लास मिला।
अपनों से भी हम ख़ूब मिले, बीतीं यादों का भी साथ मिला।
कुछ लिखीं कविताएं पृष्ठों पर , अनुभूतियों को संवाद मिला।
काया में स्फूर्ति और हृदय में ऊर्जा का संचार मिला।
— Kavita Prabha
लम्बे सप्ताहांत की छुट्टी में
मन को नया विस्तार मिला
अपनों से मिलकर बीती यादों को
एक नया आकार मिला,उनसे प्रेरित होकर
कुछ कविता संगम रच डाले
कुछ कहानी संग्रह का निर्माण किया
और इन छुट्टियों को यादगार बना लिया ।।
— Anita Gupta
दिन, रात, साल, महीने
एक – एक कर आये,
बदलते मौसम की तरह
अपनी यादें छोड़ गये।।
— Sarvesh Kumar Gupta
एक उम्र से मै अपने साये में खड़ा हूँ
कभी खुद को कभी आईने को देखता हूँ
इसी कश्मकश में ज़िंदगी फिसल गयी
और देखते देखते धूप ढल गयी ।।
— Anita Gupta
उम्र के उस ढलान पर खड़ी हूँ
जहाँ सब कुछ बेरंग सा दिखता है
जिन्दगी थकी – थकी सी लगती है,
क्योंकि जिन्दगी की धूप ढलने लगी है
अब साए दिखने लगे हैं।।
— Manju Lata
धूप ढलने लगी है पर शाम नहीं होने पाई,
दीप्त है हृदय सुकर्मों से, कालिमा कहीं नहीं छाई।
— Kavita Prabha
तुम्हें नज़र नहीं आता,मेरा अक्सर टूटकर बिखर जाना।
समेटकर ख़ुद ही मैंने बार बार ख़ुद को जोड़ा है।
— Kavita Prabha
सोच का बहुत बड़ा अंतर है!
समस्या समाधान के साथ है,
भरोसा स्वयं के साथ चलत है,
जिंदगी भी विचारों के साथ है।
….. पर नज़र नही आता!!
— Sarvesh Kumar Gupta
हमें, तुम्हें नज़र ही नही आता
माया का वह झीना आवरण,
सुख स्वयं के भीतर ही है और
हम कर रहे हैं चारों ओर भ्रमण।
— Neeti Jain
कब तक दूसरों की आलोचना करते रहोगे
उनमें कमियाँ निकालते रहोगे
कभी तो अपनी तरफ देखो
अपना दोष तुम्हे नज़र नहीं आता ?
— Anita Gupta
क्या तुम्हें नजर नहीं आता
प्रेम को पाना है तो प्रेम लुटाना भी होता है
कोई भी चीज एक तरफा नहीं होता
एक बार अपने अंतस में झांक लो
फिर करो निंदा दुसरों की।।
— Manju Lata
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