हर चुनौती को स्वीकारा है मैंने

हर चुनौती को स्वीकारा है मैंने

-रंजीता नाथ घई सृजन

कुछ इस तरह से तुझको जिया है मैंने ऐ ज़िन्दगी
कि तेरे हर रंग से मैने होली खेली है।

कभी दोस्तों के साथ तो कभी अकेले ही
मैने ये दुनिया टटोली है।

कभी हँसकर, कभी हँसाकर  तो कभी रोकर
तुझसे हर पल बेहद मुहब्बत की है।

माना कि तेरा कोई दिन ना था एक समान
पर तेरी हर चुनौती को स्वीकारा है मैंने ।

ना मानी कभी हार मैंने
ना मुझे कभी धुत्कारा तूने।

कभी अल्लड, कभी ज़िद्दी, कभी नटखट है तु पर,
बड़ी ही अनमोल और खूबसूरत तुझे पाया मैंने।

ऐ ज़िन्दगी, तुझे हर पल इस तरह से जिया है मैंने…
कि तेरे हर रंग से मैंने होली खेली है।

एक सैन्य पत्नी के रूप में मैं हमेशा अपने जीवन की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अपने जीवन के सभी उतार-चढ़ावों के साथ मैंने जीवन का आनंद लेना सीखा है। कभी-कभी यह एक लुटे हुए बच्चे की तरह बर्ताव करती है, कभी-कभी किसी परवाह और दुलार करने वाली मां की तरह तो कभी-कभी एक प्रेमी की तरह व्यवहार करती है, लेकिन उसने हमेशा मुझे एक निष्पक्ष सौदा दिया है| ज़िन्दगी के हर रंग का मैंने लुत्फ़ उठाया है उसके हर रंग से मैंने होली खेली है| जीवन रंगीन है और इसका मतलब जीवित रहना ही नहीं होता| आप जीवन के सभी रंगों का आनंद लें और यकीनन आप निराश नहीं होंगे।

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