नहीं रखना किसी से भी कोई शिकवा | जो कभी मेरा था | किसका रास्ता देख रहे हो

इस दुनियां में अपनों से ही मिलती है बेरुखी
जब अपने ही करते हैं अपनों की अनदेखी
मन को बहुत पीड़ा देती है ये स्थिति
अपनों के बीच में अपनेपन की अनुपस्थिति
है ये आज के दौर का नया अंदाज
ग़ैर को चुनकर अपनों को करना नजर – अंदाज
अब क्या किसी से गिला करें, और क्या शिकवा
नहीं रखना किसी से भी कोई शिकवा ।।
-नूतन योगेश सक्सेना

is duniyaan mein apanon se hee milatee hai berukhee
jab apane hee karate hain apanon kee anadekhee
man ko bahut peeda detee hai ye sthiti
apanon ke beech mein apanepan kee anupasthiti
hai ye aaj ke daur ka naya andaaj
gair ko chunakar apanon ko karana najar – andaaj
ab kya kisee se gila karen, aur kya shikava
nahin rakhana kisee se bhee koee shikava ..
-nootan yogesh saksena


नहीं रखना मुझे किसी से कोई शिकवा
जब खुद मेरे अन्दर है इतनी सारी कमियाँ
सुधार लूँ पहले खुद से खुद को
अपने अंतस में झांक लूँ
खुद को पहचान लूँ
तब शायद शिकवा ही न रह जाएगा किसी से ।।
-मंजू लता

nahin rakhana mujhe kisee se koee shikava
jab khud mere andar hai itanee saaree kamiyaan
sudhaar loon pahale khud se khud ko
apane antas mein jhaank loon
khud ko pahachaan loon
tab shaayad shikava hee na rah jaega kisee se ..
-manjoo lata


खुद से है सारी शिकायत
वक़्त से तो ठीक ही होता
पर पास मेरे किस्मत नही
फिर क्यों किसी से शिकवा
-सर्वेश कुमार गुप्ता

नहीं रखना किसी से भी कोई शिकवा | जो कभी मेरा था | किसका रास्ता देख रहे हो
नहीं रखना किसी से भी कोई शिकवा | जो कभी मेरा था | किसका रास्ता देख रहे हो

khud se hai saaree shikaayat
vaqt se to theek hee hota
par paas mere kismat nahee
phir kyon kisee se shikava
-sarvesh kumaar gupta

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